जाने क्यों मैं देता हूं शब्द अपनी भावनाओं को

जाने क्यों मैं देता हूं शब्द अपनी भावनाओं को   मैं रोक देता हूं उस धार को जो बहती है

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अच्छा लगता है..

अच्छा लगता है.. ये शाम न जाए, कभी रात ना हो          उदासी-अंद्धेरे की बरसात ना हो

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