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  • भारत भूमी प्यारी

    गगन चूमता है. नीचे चरणों तले पड़ा, नित सिन्धु झूमता है. झरने अनेक झरते, जिसकी पहाडियों में, चिड़िया चहकती रहती, जहाँ मस्त झाड़ियो से. भाषा अनेक, जाती अनेक, रहे जहाँ मिल-जुल कर एक, बसे जहाँ एकता हमारी, वो है भारत भूमी प्यारी. — Vishal  * © MagMug 2016 . Unauthorised use and/or duplication of this material without

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  • अच्छा लगता है..

    अच्छा लगता है.. ये शाम न जाए, कभी रात ना हो          उदासी-अंद्धेरे की बरसात ना हो हाँ ले चल मुझे कहीं साथ अपने, जहाँ बंदिशों की कोई बात ना हो वो रोना, वो गाना, सताना, मानना, करें जब जो चाहें,जो दिल ने ठाना, बहें धार में हम अपने ही दिल के,

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